रेप पीड़िता को जेल से मिली धमकी, बॉम्बे HC ने अधीक्षक से मांगी रिपोर्ट मुंबई पूर्णिमा तिवारी

Maharashtra: रेप पीड़िता को जेल से मिली धमकी, बॉम्बे HC ने अधीक्षक से मांगी रिपोर्ट

मुंबई पूर्णिमा तिवारी
मैट्रिमोनियल्स साइट्स पर 14 अलग अलग प्रोफाइल बनाकर महिलाओं से संबंध बनाने वाला आरोपी अब नवी मुंबई की तलोजा जेल से शिकायतकर्ताओं और गवाहों को लेटर लिख धमका रहा है.
इस बात का खुलासा मामले में एक पीड़िता के वकील प्रशांत पांडेय ने कोर्ट में किया है. बॉम्बे हाईकोर्टके संज्ञान में जब ये बात आई तो कोर्ट ने जेल अथॉरिटी को तलब किया और डिटेल रिपोर्ट फाइल करने का आदेश दे दिया है. जिसके बाद अब जेल अथॉरिटी इस बात का ठीकरा पुलिस पर फोड़ रही है.

तलोजा जेल में बंद आरोपी सचिन सांबरे पाटिल ने एमबीए करने के बाद कई कंपनी में मार्केटिंग टीम में काम किया, लेकिन औरतों की जिंदगी खराब करने के आरोप में आज सलाखों के पीछे बंद है. दरअसल सचिन ने मैट्रिमोनियल्स साइट्स पर अपनी 14 अलग अलग प्रोफाइल बनाई थी. जिसके बाद उसने लगभग 2500 महिलाओं को शादी के लिए प्रपोजल भेजा. जिसमें से 805 महिलाओं ने सचिन के प्रपोजल में इंटरेस्ट लेते हुए पॉजिटिव रिपॉन्स दिया था.

तीन शादी,वकील महिला के साथ 2 साल तक रेप.. फिर ऐसे पहुंचा जेल

सचिन सांबरे पाटिल ने 3 जून 2014 में एक महिला सिपाही से शादी की थी. जिसके अगले ही दिन यानि 4 जून 2014 को सचिन ने एक महिला प्रोफेसर से भी शादी कर ली. इसके बारे में जब उसकी कांस्टेबल पत्नी को पता लगा तो उसने सचिन के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 417 के तहत एफआईआर दर्ज करा दी. आरोपी ने कांस्टेबल और प्रोफेसर बीवी के आलावा भी एक तीसरी लड़की से शादी कर ली. जिससे उसे एक बच्चा भी है. साल गुजरते रहे लेकिन सचिन में कोई बदलाव नहीं आया.

 

साल 2018 में उसने मैट्रिमोनियल साइट्स के जरिए एक महिला वकील से फेसबुक के जरिए दोस्ती की, फिर प्यार के झांसे में फंसा सचिन ने महिला से भी शारीरिक संबंध बनाए और जब वो प्रेगनेंट हो गई तब उसका गर्भपात करवा दिया. सचिन 2 साल तक महिला वकिल के इज्ज़त से खिलवाड़ करता रहा. सचिन की हरकतें देख पीड़िता को उस पर शक हो गया था कि वो उससे शादी नहीं करने वाला है. एक ठग है तब महिला ने नवी मुंबई में सचिन के खिलाफ मई 2020 में रेप का मामला दर्ज कराया. एक महिने के भीतर पुलिस ने सचिन को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद सचिन को तलोजा जेल में ज्यूडिशियल एंड कंप्यूटर सेक्शन में काम कराया जाने लगा.

सचिन ने जेल में अपने काम का फायदा उठाना शुरू कर दिया और जेल के काम के बहाने वहां से सभी पीड़िताओं और गवाहों को पत्र लिखकर धमकाने लगा.अब सवाल यह उठता है कि पीड़िताओं का एड्रेस आरोपी ने कैसे हासिल किया तो इसके पीछे भी दिलचस्प कहानी है कि आरोपी ने जेल अथॉरिटी में आरटीआई करवाया कि शिकायत दर्ज कराने वाली महिला विगत वर्षो में कहां कहां किराए पर रही. जेल अथॉरिटी ने आरटीआई का जवाब ढूंढने के लिए पुलिस को आरटीआई भेज दी. पुलिस महकमें ने जब एक लैंडलॉर्ड से संपर्क किया तो पीड़िता को पता चला कि आरोपी की तरफ़ से यह सब आरटीआई के जरिए जानकारी जुटाई जा रही

इस बारे में पीड़िता ने कोर्ट में गुहार लगाई और कहा कि आरोपी को यदि अंतरिम राहत मिलती है तो पीड़िता की मुश्किलें बढ़ सकती है. इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने इसी 15 मार्च को जेल अथॉरिटी को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है. अगली सुनवाई 5 अप्रैल को रखी गई है तब यह साफ हो पाएगा कि आखिर आरोपी को पीड़िता का पता देने के लिए कौन जिम्मेदार है?

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