मंदबुद्धि बाल गृह मानखुर्द में बच्चों पर अत्याचार,

मंदबुद्धि बाल गृह मानखुर्द में बच्चों पर अत्याचार, शिकायतों का भी संचालकों पर नहीं होता असर

 

मुंबई आशीष सिंह

 

मतिमंद बच्चों पर अत्याचार रोकने में नाकाम साबित हो रहा प्रशासन

बच्चों को पीटने का आरोप

आरटीआई से भी नहीं मिलती जानकारी

बच्चों को रखा जाता है भूखा

शिकायत की जाए तो उसे निजी कारण बताकर शिकायतों की उपेक्षा की जाती है

मुंबई: एक तरफ जहां प्रशासन दिव्यांगों के लिए नई नई योजनाएं बनाती है उनके लिए अलग से व्यवस्था करती है वहीं ठीक इसके विपरीत द चिल्ड्रन एंड सोसायटी (The Children and Society) द्वारा संचालित मंद बुद्धि बाल गृह मानखुर्द (Mankhurd) में मंदबुद्धि के बच्चों (Mentally retarded children) पर अत्याचार (Torture) किया जा रहा है। इसकी शिकायत स्थानीय लोगों ने की इसके बावजूद संचालकों पर कोई असर नहीं हो रहा बच्चों पर अत्याचार बदस्तूर जारी है।

 

सरकार ने दिव्यांगों के लिए बसों, ट्रेनों और सरकारी संस्थानों में विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। यहां तक की उनकी जीविका के लिए अनाज और नौकरियों में भी आरक्षण कर रखा है, मतिमंद बच्चों के लिए सरकार ने मानखुर्द में मंदबुद्धि बाल गृह के संचालन की जिम्मेदारी दी चिल्ड्रेन एंड सोसायटी को दे रखा है और उसके रखरखाव के लिए राशि निर्धारित कर रखी है, सोसायटी किसी भी तरह का खर्च स्वयं नहीं उठाती उसे राज्य सरकार का समाज कल्याण विभाग पूरा करता है और सहायक आयुक्त समाज कल्याण मुंबई नजर रखता है, इसके अलावा आयुक्त दिव्यांग कल्याण महाराष्ट्र को भी जिम्मेदारी दी गई है।

बच्चों को पीटने का आरोप

 

स्थानीय लोगों को बच्चों पर अत्याचार की जानकारी मिली उन्होंने शिकायत की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। खबर है कि हर वक्त बच्चों को मारपीट कर रुलाई जाता है। यहां कुर्सी पर विराजमान मुख्याध्यापक और चंद कर्मचारी सब सरकारी है। जबकि लोगों को बताया जाता है की ये गैर सरकारी संस्था है अपने रुपए से मंदबुद्धि बाल गृह चला रही है जबकि महिला बाल कल्याण विभाग और समाज कल्याण विभाग इसे संभाल रहा है।

 

आरटीआई से भी नहीं मिलती जानकारी

 

मंदबुद्धि बाल गृह मानखुर्द में करीब 275 बच्चे हैं, ये सभी बच्चे अनाथ है, स्थानीय वकील अभिषेक तिवारी ने मंदबुद्धि बाल गृह की स्थिति देख कर दुख व्यक्त किया और इसकी शिकायत समाज कल्याण विभाग में की। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। जबकि आर टी आई नियमों के मुताबिक 30 दिन के भीतर जानकारी देना चाहिए।

 

बच्चों को रखा जाता है भूखा

 

बच्चों को खाना नहीं दिया जाता, किसी ना किसी बात पर उन्हें मारा पीटा जाता है, प्रताड़ित किया जाता है। हालांकि मंदबुद्धि बाल गृह के भीतर बच्चों पर हो रहे अत्याचार को रोकने की कोशिश वर्षों से की जा रही है। लेकिन प्रशासन पर कोई असर नहीं होता, अगर संचालक मुख्याध्यापक जो कि महिला हैं उनसे मिलने और बात करने की कोशिश की जाए तो नाकों चने चबाने से कम नहीं मीडिया के नाम से बिदकना जैसे उनकी फितरत है। एक महिला होकर मंदबुद्धि के बच्चों के ऊपर अत्याचार सोचने के लिए मजबूर कर देता है।

 

शिकायत की जाए तो उसे निजी कारण बताकर शिकायतों की उपेक्षा की जाती है

स्थानीय नागरिक अभिषेक तिवारी का कहना है कि यहां के बच्चे लावारिस ओर मेंटली रिटायर होते हैं, सरकार इनकी देखभाल के लिए हर कदम उठाती है। लेकिन अंदर बैठे अधिकारी बच्चों का खाना तक खा जाते हैं, हमने समाज कल्याण विभाग में शिकायत की लेकिन उसका कोई जवाब नहीं दिया गया, लेकिन शिकायत के बाद समाज विकास के अधिकारियों ने दौरा किया और शिकायतों को सही पाया इसके बावजूद मंदबुद्धि बाल गृह को केवल नोटिस जारी की गई जबकि कार्रवाई करनी चाहिए।

 

मतिमंद बच्चों पर अत्याचार रोकने में नाकाम साबित हो रहा प्रशासन

एडवोकेट, अजय जैसवार बताते हैं, राज्य सरकार का समाज कल्याण विभाग मतिमंद बच्चों के लिए काम करता है। बच्चों को भोजन से लेकर कपड़े, साबुन, खेलकूद की व्यवस्था, मनोरंजन और हर बुनियादी चीजों को राज्य सरकार का समाज कल्याण विभाग पूरा करता है लेकिन बच्चों तक ये सारी चीजें नहीं पहुंचती है। बच्चों को प्रताड़ित किया जाता है, बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। इस पर रोक लगनी चाहिए।

खबरें और भी हैं...