कृषि महाविद्यालय को मिली दो कृषि पाठयक्रमों में परास्नातक कराने की मंजूरी

कृषि महाविद्यालय को मिली दो कृषि पाठयक्रमों में परास्नातक कराने की मंजूरी

रिपोर्ट ‘ डा.बीरेन्द्र सरोज आजमगढ

आजमगढ / कृषि महाविद्यालय कोटवा आजमगढ़, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्र्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित है, में कृषि स्नातक का पाठयक्रम वर्ष 2015 से संचालित हो रहा है परन्तु अब यहां कृषि प्रसार शिक्षा एवं कृषि अर्थशास्त्र दो विषयों में अगले सत्र से परास्नातक कराने की स्वीकृति भी प्राप्त हो गयी हैl विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परिषद की सत्र 2022-23 की समिति की 298वी बैठक मे यह निर्णय लिया गया l परास्नातक पाठयक्रम होने की वजह से पूर्वांचल एवं समीप के राज्य के छात्र छात्राओं को शिक्षा एवं शोध के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त हो सकेगी l इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो धीरेन्द्र कुमार सिंह के दिशा निर्देशन में एक बैठक आहूत की गई जिसमें परास्नातक कराने के विषय मे चर्चा हुई एवं इस निष्कर्ष पर पहुँचा गया कि भूमि के अभाव में कृषि के अन्य सभी विषयों में परास्नातक संचालन कर पाना सम्भव नहीं हैI जिसके लिए जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार द्वारा
अथक प्रयास किया जा रहा हैl अधिष्ठाता की संस्तुति के उपरांत शैक्षणिक परिषद की बैठक मे इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया गया I समिति के अध्यक्ष डॉ बिजेंद्र कुमार सिंह एवं सभी सदस्यों की सहमति से परास्नातक चलाने की स्वीकृति प्राप्त हुई I कुलपति ने हर्ष के साथ यह कहा कि छात्रों एवं प्राध्यापकों के द्वारा शोध कार्य किया जाएगा जोकि भविष्य में पूर्वाचल के किसानों तक नई तकनीकी पहुंचा कर किसानों की आय दोगुनी करने में मददगार साबित होगी I अधिष्ठाता ने संकाय के सभी सदस्यों को बधाई दी एवं उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा एवं शोध कराने हेतु जोर दिया l कृषि अर्थशास्त्र एवं कृषि प्रसार शिक्षा के शोधार्थी किसानों की कृषि संबंधी समस्याएं एवं उनके समाधान आदि विषयों पर शोध कर पाएंगे एवं पूरे उत्तर प्रदेश के किसान इससे लाभान्वित होंगे I इन विषयों में वो सभी छात्र जिन्होंने कृषि से स्नातक किया है प्रवेश ले पाएंगेl इन विषयों के संचालित होने से छात्रों के साथ साथ ग्रामीण समाज एवं किसानो को भी इसका भरपूर फायदा मिलेगा I महाविद्यालय की कृषि प्रसार शिक्षा की सहायक प्राध्यापक डॉ रेनू गंगवार ने कहा कि यह निर्णय ग्रामीण समाज के विकास में अहम भूमिका निभाएगा एवं कृषि पद्धतियों से संबंधित सूचना, ज्ञान एवं कौशल को किसानों तक पहुचाने में मदद करेगा वही कृषि अर्थशास्त्र के सहायक प्राध्यापक डॉ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि यह निर्णय किसानों के अर्थिक विकास एवं कृषि औद्योगिकीकरण में मददगार होगा I इस सूचना से कृषि महाविद्यालय में हर्ष का माहौल है l

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